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Best Actor के साथ Best Director भी साबित हुए Ajay Devgan, ‘Runway 34’ के हर सीन ने किया इंप्रेस… मेरा रिव्यू

आपको हैदराबाद का डॉक्टर रेप कांड तो याद ही होगा। खैर याद कैसे नहीं होगा, वही तो एक रेप कांड था जिसमें आरोपियों को जो सज़ा मिली थी। मगर, उसके बाद उस पुलिस की एनकाउंटर टीम पर जांच बैठी थी। काफी लोगों ने इसका विरोध भी किया था। करते भी क्यों ना आखिर पहली बार भारत के इतिहास में इतनी जल्दी किसी रेप विक्टिम को इंसाफ मिला था। लोगों के लिए वो पुलिस टीम और उससे जुड़े लोग देवता थे, पर हमारे देश का कानून है कि, यहां कोई देवता नहीं होता। सबके उपर कानून है। इसलिए जांच होना ज़रूरी हैं। भले जनता किसी भी चश्मे से आपको देखे, मगर, जवाब तो आपको देना पड़ेगा। पर सवाल उठता है कि सबसे काबिल अफसर भी क्या ग़लती कर सकता है… वो जिसने आपकी जान बचाई, जो इतना काबिल है जिसपर सवाल उठाना गुनाह सा लगें, क्या उससे भी कुछ ऐसा हो सकता है… बस इसी भरोसे को चैलेंज करती है निर्माता निर्देशक और एक्टर अजय देवगन कि नई फिल्म रनवे34 जिसके बारे में आज हम आपको बताएंगे।

Runway 34

आपको बता दें कि, सबसे पहले बात करते है कहानी की…रनवे34 कहानी है एक सीनियर पायलेट विक्रांत खन्ना की, जो अब अपने प्रोफेशन के उस स्टेज पर है जहा्ं आकर हर इंसान को लगने लगता है की अब यहां से मुझे कोई नीचे नहीं गिरा सकता। वो जैसे ही स्क्रीन पर आते है, उनके सूटकेस कैरी करने की बॉडी लैंग्विज से लेकर उनके सिगरेट पीने के स्टाइल तक, हर चीज़ से ऐसा लगता है कि, ये अब इस फिल्ड के तेनडुल्कर है, जिनसे कभी कुछ ग़लत नहीं हो सकता। चाहे उनकी चाल के पीछे बजता बीजीएम हो या फिर उनके चश्में में दिखतीं और उनको घूरती सुंदर लड़कियां। आप देखते ही समझ जाएंगे की ये किरदार आपके आस-पास का वहीं शख्स है जो हर बार पीने के बाद आपसे कहता है की यार ये काम तो मैं यूहीं कर दूंगा। बस-बस आप सही समझे।

हां तो इस ओवर-टू-परफेक्ट आदमी की लाईफ तब पलटती है जब इनकी एक फ्लाईट जो कोचिन जा रही थी, वो टेक्निकल फॉल्ट और ख़राब मौसम के कारण इनकी जिंदगी की असलियत और काम के प्रती विक्रांत के ओवर कॉफिडेंस के माफिक हवा में गोते खाने लगती है। जिसे वैसे तो ये बचा लेतें हैं, मगर, इस एक वाक्या से जो टर्बुलेंस विक्रंत के जीवन में आती है, ये कहानी उसकी है…वैसे सच कहूं इस कहानी के दो पहलू हैं, जैसे अजय ख़ुद कहते हैं ना कि हर सिक्के के दो पहलू होते है, हां बस वैसे ही, ये कहानी इंटरवल से पहले अजय की है, जिसके हीरो वो है। फिर चाहे उनकी बेहद सजग और सिंपल बट कॉम्पलैक्स एक्टिंग हो या फिर उनकी आंखें, जिससे वो सीधा आपके दिल में एंटर कर जातें हैं।

हां जी तो अब बात आती है कि कहानी कैसी है… तो देखिए सबसे बड़ी शिकायत आपको ये होगी कि आप ना तो ऐवियेशन डिपार्टमेंट के बारे में कुछ जानते हैं और ना ही प्लेन कैसे उड़ाया जाता है उस मामले में… और डायरेक्टर ने आपको ये बात समझाने कि कोशिश की भी नहीं हैं। लगभग ,सारे टेक्निकल टर्मस् यहां, मगर कोई किरदार सरल भाषा में कोई बात नहीं करता… दूसरी बात, इंटरवल से पहले आप यहीं सोचते है की ट्रेलर में दिखाऐ गए काफी सींस तो पिक्चर में है ही नहीं… और हां जब एक ऐवियेशन जर्नलिस्ट उठकर सीधे तौर पर कहता है कि ये प्लेन जिसका रूट तो असल में बैंग्लोर होना चाहिए ऐसे मौसम में वो त्रिवेड्रम क्यों घूमाया जा रहा है, जबकि वहां भी मौसम कोचिन जैसा ही है।

तो उसको एक मामूली सा यूट्यूबर ये कहकर चुप करवा देता है की चचा आप पायलेट थोड़ी ना हो, चिल करो… वैसे यूट्यूबर से याद आया इस फिल्म से कैरीमिनाटी यानी अजय नागर ने अपना बॉलीवुड डेब्यू किया है, वो भी बस चलते प्लेन में, भारी टरब्युलेंस के बीच विडियो बनाने के लिए और हां ताकी कैरी के नाम पर लोग थीयेटर्स तर आ जाएं बस।

समझ नहीं आता की अजय देवगन कि बीवी का किरदार जो आकांशा सिंह ने निभाया है, फिल्म में क्यों था… क्योंकि अगर ऐसा नहीं भी होता तो भी काम चल जाता, पर हां शायद विक्रांत मुश्किल में छोड़कर जाने वालों में से नहीं है, ये बार-बार कहने के लिए ये किरदार डाला गया है। हालांकि आकांशा जचतीं हैं। वैसै उनके अलावा फिल्म में एक और फिमेल किरदार है रकुलप्रीत का जिनका नाम तान्या एल्बाकर्की हर कोई ग़लत लेता है… पर एक कोपाईलेट बनकर रकुल अजय के साथ रनवे34 के प्लेन को आपके दिल के रनवे पर उतारने का पूरा काम करतीं हैं।

रनवे34 की कहानी एक सच्ची घटना पर आधारित है। 18 अगस्त, 2015 की सुबह जेट एयरवेज़ की फ़्लाइट 9W-555 दोहा, कतर से कोच्चि, केरल के लिए निकली लेकिन खराब मौसम की वजह से फ़्लाइट लैंड नहीं कर पाई। फ़्लाइट को तिरुवनंतपुरम डायवर्ट कर दिया गया लेकिन वहां भी पायलट्स लैंडिंग नहीं करवा पाए। यहां भी मौसम बेहद खराब था। पायलट्स ने मे डे कॉल इनीशिएट किया। कई असफ़ल प्रयासों के बाद ये फ्लाइट सिर्फ़ 250 किलोग्राम फ़्यूल के साथ तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डे पर लैंड की। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स का कहना है कि फ़्लाइट में 350 किलोग्राम इंधन था। ये बोइंग 737 एयरक्राफ़्ट थी और इसमें 1500 किलोग्राम इंधन रिज़र्व रहना चाहिए, जो ज़ाहिर तौर पर इसमे नहीं था।

पर इतनी विषम परिस्थितयों में भी पायलट ने लैंडिंग करवाई. उन्हें बार-बार वॉर्निंग दी गई, सावधान किया गया लेकिन उन्होंने किसी भी चेतावनी पर ध्यान नहीं दिया… इसलिए 150 लोगों की जान जोखिम में डालने के लिए हटा दिया गया…
वैसे फिल्म में एक सीन ऐसा भी है जिसमें प्लेन में फ्यूलिंग के टाईम एयरपोर्ट स्टाफ के दो लोग आपस में केजी और पाउंड के बीच के फर्क पर बेहस कर रहें हैं, ये सीन दरअसल असल ही है मगर ये कंफ्यूज़न एक दूसरी फलाईट के साथ हुआ था, जो दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी।

वीएफएक्स की बात करें तो अच्छे हैं, मगर कई जगह आप ये समझ जाते हैं की कहां पर ग्रीन स्क्रीन का इस्तेमाल हुआ है। हालांकी फिल्म के पीछे का बैक्ग्राउंड म्यूज़िक आपको बांधकर रखता है, और जैसे-जैसे फ्लाईट को झटके लगते है आपका दिल भी धक-धक करता हैं।
कुल मिलाकर कहा जाऐ, तो रनवे34 एक अच्छा अटैम्पट है जिसे बिल्कुल देखना चाहिए, किसी के लिए नहीं तो अमिताभ के बढिया कोर्टरूम सीक्वेंस के लिए जिसको देखकर कुछ पल के लिए आप पिंक,बदला, और चेहरे जैसा महसूस करेंगें… बाकि फिल्म में बमन इरानी एक लालची और अपनी कंपनी को बचाने के लिए कुछ भी करने को तैयार कंपनी मालिक के तौर पर नज़र आएंगें… जिनका किरदार एवियेशन बिजनेस में चलती राजनीती की एक झलक है।

कुल-मिलकर कहा जाऐ, तो रनवे34 एक अच्छा एक्सपिरियंस है, जो हां आप फैमली के साथ इंजोय कर सकते हैं, थीयेटर जाएं पर बहुत उम्मीद के साथ नहीं…

By : News Desk

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