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उत्तर प्रदेश चुनाव- दलित बहुल विधानसभा सीट है आगरा कैंट

आगरा कैंट विधानसभा
शाहजंहा के अमर प्यार की निशानी वाले आगरा की जहां पर 2017 में राजनीति का इतिहास बनाया और चुनाव में जब भाजपा ने यहां की सभी नो सीटों पर जीत दर्ज करते हुए तमाम विपक्ष का सफाया कर दिया था। लेकिन हम आज बात कर रहे हैं आगरा कैंट सुरक्षित सीट की जहां पर आने वाली 10 फरवरी को मतदान होना है। और नामाकंन की प्रक्रिया के साथ प्रचार कार्य शुरू हो चुका है। प्रत्याशियों की बात करें तो, सभी राजनैतिक दलों ने अपने प्रत्याशी मैदान में उतार दिए हैं।


किसने किसे उतारा मैदान में
आगरा कैंट से भाजपा ने डा. जीएस धर्मेश को अपना प्रत्याशी बनाया है तो बसपा ने भारतेंदु अरूण को अपना चेहरा बनाया है। जबकि सपा ने कुंवर सिंह के रूप में एक वकील को चुनाव लड़ाया है। जहां तक बात कांग्रेस की है तो कांग्रेस ने बाल्मिकी समाज के युवा सिकंदर बाल्मिकी को अपना प्रत्याशी घोशित किया है। बात चुनाव में पड़ने वाले जातिए प्रभाव की करते हैं। तो, आपको बता दें कि इस सीट पर जाटव मतदाता सबसे अधिक संख्या में पंजिकृत हैं। जबकि बाल्मिकी, ब्राहमण, राठौर तथा मुस्लिम मिलकर चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। सिंधी व पंजाबी मतों की संख्या भी अपना प्रभाव रखती है।


बसपा कर सकती है, जीत का दीदार
2022 की फरवरी महीने की 10 तारीख को होने वाले मतदान के बाद, किसका भाग्य चमकेगा और किसका नसीब खराब रहेगा। इस पर चर्चा करते हैं और देखते हैं कि पूरे देश में दलितों का गढ़ समझा जाने वाला आगरा मोदी-योगी लहर में बह गया ओर दलितों का एक बड़ा वोट बैंक भाजपा की झोली में जा गिरा था। लेकिन 2 अप्रेल काण्ड ने दलितो को भाजपा से अलग ही कर दिया है। जबकि सपा-रालोद गठबंधन भी इस वोट बेंक से वंचित ही रहेगा। इसके अलावा भाजपा के विरोध में पड़ने वाला मुस्लिम वोट भी कांग्रेस व बसपा को जा सकता है। जिसके कारण भाजपा व सपा के लिए यह सीट नाउम्मीद जता रही है। जबकि सपा की बढ़त को कांग्रेस रोकने में सफल रही तो बसपा यहां जीत का दीदार कर सकती है।

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